नई दिल्ली, 03 अप्रैल। Wakf Amendment Bill : वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में लगभग 12 घंटे की गरमागरम बहस के बाद पास हो गया है। आज इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जा रहा है और इसे आज ही पास किया जाएगा। वक्फ बिल संपत्तियों के मैनेजमेंट और रेगुलेशन में कई बदलाव लाता है। यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सरकारी निगरानी में लाने और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देता है। बिल के कानून बन जाने के बाद भी मुसलमान वक्फ बना सकेंगे, लेकिन सख्त नियमों और शर्तों के साथ। 8 बिंदुओं में समझे 1- वक्फ बाय यूजर का खात्मा वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ मानी जाएगी, जिसे औपचारिक रूप से (यानी लिखित दस्तावेज या वसीयत के जरिए) वक्फ के लिए समर्पित किया गया हो. लेकिन पहले ऐसा नहीं था। वक्फ बाय यूजर” एक पारंपरिक तरीका था जिसके तहत कोई संपत्ति, जैसे मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह, अगर लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक या सामुदायिक कामों के लिए इस्तेमाल हो रही थी, तो उसे बिना किसी औपचारिक दस्तावेज या घोषणा के भी वक्फ मान लिया जाता था। ये इस्लामिक कानून और भारत में वक्फ की पुरानी प्रथा का हिस्सा था। लेकिन लोकसभा में पास बिल में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। अब अगर कोई जमीन या इमारत सालों से मस्जिद या कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, लेकिन उसके पास वक्फ का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है, तो अब उसे वक्फ नहीं माना जाएगा। हर वक्फ संपत्ति को जिला कलेक्टर द्वारा जांचा जाएगा। बिना सबूत के कोई भी जगह पर वक्फ बोर्ड दावा नहीं कर सकेगी। इसे एक उदाहरण के जरिये समझाते हैं- मान लिया जाए एक गांव में 100 साल से एक जमीन पर कब्रिस्तान है, लेकिन कभी इसे औपचारिक रूप से वक्फ घोषित नहीं किया गया। पहले, ‘वक्फ बाय यूजर’ के तहत इसे वक्फ मान लिया जाता था। अब नए कानून के बाद, अगर वक्फ बोर्ड के पास इस जमीन के कोई दस्तावेज नहीं है, तो इसे वक्फ नहीं माना जाएगा। इस जमीन का सही दस्तावेज दिखाने वाला पक्ष इस पर दावा कर सकता है। 2. मुस्लिमों को संपत्ति दान करने के लिए पूरी करनी होगी शर्त वक्फ (संशोधन) बिल 2025 के तहत अब मुस्लिमों को संपत्ति दान के लिए शर्त पूरी करनी पडे़गी। बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, वक्फ’ का अर्थ है अपनी जमीन, महत्त्वपूर्ण संपत्ति या एसेट को इस्लाम की भलाई के लिए अल्लाह के नाम पर दान करना। दान केवल अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है, सरकार या किसी और की संपत्ति का नहीं। अमित शाह ने कहा कि इसमें दान देने का बड़ा महत्व है, दान उस चीज का ही किया जा सकता है जो आपकी अपनी संपत्ति है। कोई सरकारी संपत्ति का दान नहीं कर सकता है। किसी और की संपत्ति का दान नहीं कर सकता है। नए प्रावधान के तहत कोई भी मुसलमान, कम से कम 5 साल से इस्लाम को मान रहा हो और संपत्ति का कानूनी मालिक हो वही वक्फ के लिए संपत्ति दान कर सकेगा। 2013 के वक्फ संशोधन में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया था. अब इसे फिर से ले आया गया है। 3. वक्फ करने से पहले महिलाओं को उनका हिस्सा देना पड़ेगा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में एक नया प्रावधान है जो कहता है कि अगर कोई मुसलमान अपनी किसी संपत्ति को वक्फ को दान में देना चाहता है तो उसे इसकी घोषणा करने से पहले महिलाओं को उनका हिस्सा देना पड़ेगा। इसमें विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए खास प्रावधान किया गया है। उदाहरण के लिए एक शख्स अपनी 10 बीघा जमीन को वक्फ करना चाहता है। उसके पास एक बेटी, एक विधवा बहन, और एक अनाथ भतीजा है। पुराने नियम में वो पूरी जमीन को वक्फ में दे सकता था, लेकिन अब उसे इन्हें भी उनका हिस्सा देना पड़ेगा इसके बाद ही वो अपने हिस्से की जमीन को वक्फ को दान दे सकेगा। अब वक्फ बनाने से पहले ये चेक होगा कि बेटियों, बहनों, पत्नियों, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों को उनका हिस्सा मिल गया है या नहीं। अगर नहीं मिला, तो वक्फ मान्य नहीं होगा। 4.आदिवासी जमीन को नहीं कर पाएंगे वक्फ वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 में आदिवासियों की जमीन को वक्फ घोषित करने से पूरी सुरक्षा दी गई है। भारत में आदिवासी समुदायों की जमीन को संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत चिह्नित और संरक्षित किया गया है। ये जमीनें उनकी संस्कृति, आजीविका और पहचान का हिस्सा हैं। नए नियम के तहत अगर कोई जमीन आदिवासी समुदाय की है, यानी जो भारत के संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों के नाम पर दर्ज है या उनके पारंपरिक अधिकार क्षेत्र में आती है, तो उस जमीन को वक्फ बोर्ड अपने कब्जे में नहीं ले सकेगा। न ही आदिवासी समुदाय की इस जमीन को कोई मुसलमान वक्फ के लिए दान कर सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य आदिवासियों के हितों की रक्षा करना है। 5.धारा 40 की समाप्ति वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में पुराने कानून की धारा 40 को हटाने का प्रस्ताव एक बड़ा बदलाव है। इसे समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि धारा 40 क्या थी और अब इसके हटने से क्या होगा। अधिनियम की धारा 40 में प्रावधान था कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, यह निर्णय लेने का अंतिम अधिकार वक्फ बोर्ड के पास था। वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 40 वक्फ बोर्ड को ये अधिकार देती थी कि अगर उसे लगता था कि कोई संपत्ति वक्फ की है या वक्फ के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, तो वह उसकी जांच कर सकता था और उसे अपने कब्जे में ले सकता था। यानी, बिना किसी ठोस सबूत या कोर्ट के फैसले के, वक्फ बोर्ड खुद तय कर सकता था कि कोई जमीन या इमारत उसकी है या नहीं। ये शक्ति बोर्ड को बहुत ताकतवर बनाती थी। कई बार इसका दुरुपयोग भी हुआ। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में इस धारा-40 को ही समाप्त कर दिया गया है। बुधवार को किरेन रिजिजू ने इस