115 करोड़ का ओवर टाइम घोटाला, 7 बड़े चेहरे गिरफ्तार…ईओडब्ल्यू एसीबी की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

 

सीएसएमसीएल ओवर टाइम भुगतान घोटाला मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मैन पावर एजेंसियों से जुड़े 7 संचालकों और प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के बाद सामने आई है, जिसने पूरे मामले को गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में उजागर कर दिया है।

ओवर टाइम के नाम पर 115 करोड़ का खेल

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवर टाइम भुगतान के नाम पर लगभग 115 करोड़ रुपये मैन पावर एजेंसियों को दिए गए। यह राशि कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य के भुगतान के लिए थी, लेकिन इसका उपयोग पूरी तरह संदिग्ध तरीके से किया गया।

फर्जी बिल और बढ़े हुए भुगतान का खुलासा

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ओवर टाइम के नाम पर फर्जी और बढ़े हुए बिल तैयार कर शासन की राशि का आहरण किया गया। बिलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और कार्य का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

कमीशन के खेल में शामिल अधिकारी और निजी लोग

जांच एजेंसियों के अनुसार, निकाली गई राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को कमीशन के रूप में बांटा गया। कंपनियों ने भी इस रकम का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रखा, जिससे यह मामला संगठित भ्रष्टाचार का रूप लेता दिख रहा है।

इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं, जो विभिन्न मैन पावर एजेंसियों के संचालक या प्रतिनिधि हैं।

ईडी की कार्रवाई से खुली परतें

इस मामले की शुरुआत उस समय हुई जब प्रवर्तन निदेशालय रायपुर ने 29 नवंबर 2023 को तीन व्यक्तियों से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए। इसके बाद राज्य सरकार को सूचना दी गई और मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

11 मई तक पुलिस रिमांड, पूछताछ में खुलेंगे और राज

सभी आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 11 मई 2026 तक पुलिस रिमांड में भेजा गया है। इस दौरान फर्जी बिलिंग, कमीशन वितरण और राशि के अंतिम उपयोग को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी।

संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा

अब तक की जांच यह संकेत देती है कि यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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