शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला, PM आवास भी नहीं बना, घास-फूंस के मकानों में गुजर रही माझी जनजाति परिवारों की जिंदगी

Surguja: सरगुजा जिले के मैनपाट में माझी जनजाति लोगों के लिए भारत स्वच्छ मिशन योजना के तहत बनाए गए शौचालय में बड़ा घोटाला सामने आया है. शौचालय निर्माण यहां इस तरीके से किया गया कि उसका उपयोग अभी तक शुरू नहीं हो सका है, ऐसा इसलिए क्योंकि शौचालय उपयोग के लायक बनाए ही नहीं गए. दूसरी तरफ अब कई माझी परिवार घठिया शौचालय को खुद रुपए खर्च कर ठीक से बनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि बरसात कुछ महीने के भीतर आने वाला है, ऐसे में महिलाओं को खुले में टॉयलेट के लिए न जाना पड़े क्योंकि जहरीले सांप और जंगली जानवरों के चपेट में आने से कई महिलाओं और बच्चों की मौत हो चुकी है.

शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला

कमलेश्वरपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में 25 से अधिक ग्राम पंचायत में माझी जनजाति के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं 30000 से अधिक की आबादी है और आज भी इस जनजाति परिवार के लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है, ऐसा इसलिए क्योंकि भारत स्वच्छ मिशन और दूसरी योजनाओं के तहत उनके घरों में जो टॉयलेट बनाए गए उनकी क्वालिटी बेहद खराब थी. कुछ सालों में ही शौचालय जर्जर हो गया और टूटकर बिखर गया तो कई परिवारों में सिर्फ कागजों में ही शौचालय का निर्माण ग्राम पंचायत के द्वारा किया गया. यही वजह है कि 90% से अधिक माझी जनजाति परिवार के लोग खुले में शौच करने के लिए जाने के लिए विवश दिखाई देते हैं.

महिलाएं को ज्यादा परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को है क्योंकि आज भी महिलाएं शाम ढलने का इंतजार करती है, और जब शाम ढल जाता है तब सो के लिए घर से कुछ दूर में खेत या जंगल के आसपास जाती है. कुनिया ग्राम पंचायत की माझी जनजाति की महिलाओं ने बताया कि उनके घर के बाहर ग्राम पंचायत के द्वारा शौचालय बनाया गया लेकिन शौचालय का लोहे का जो गेट लगाया गया वह इतना खराब क्वालिटी का था कि कुछ दिन बाद ही टूट कर अलग हो गया और इसके बाद वे शौचालय का उपयोग नहीं कर सके.

रम्मती नामक माझी जनजाति की महिला ने बताया कि बरसात के समय उन्हें बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि एक तरफ बारिश होती रहती है तो दूसरी तरफ उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है और इस दौरान जहरीले सांप से सामना होता है. वहीं महिलाए खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं.

घास-फूंस के मकानों में गुजर रही माझी जनजाति परिवारों की जिंदगी

दूसरी तरफ माझी जनजाति परिवार के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी नहीं मिले हैं और इस बरसात में भी माझी जनजाति के लोगों को घास-फूस से बने मकान में रहते हुए बारिश होने पर पूरी रात जागरण करना पड़ेगा, क्योंकि बारिश का पानी घास फूस वाले छत से होते हुए उनके घर के भीतर तक पहुंच जाएगा.

मैनपाट जनपद पंचायत क्षेत्र में 1000 से अधिक मकान का निर्माण सिर्फ और सिर्फ कागजों में ही हुआ है जबकि इन मकानों के निर्माण के लिए रुपए जारी किए जा चुके हैं बताया जा रहा है कि इन मकानों के निर्माण के लिए जो रुपए जारी किए गए वह रुपए माझी जनजाति परिवार के मुखिया के नाम पर न जाकर दलालों के खाते में चला गया. इस पूरे खेल में जनपद पंचायत के अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत थी, जांच में इसका खुलासा भी हुआ था लेकिन इसके बावजूद अभी तक माझी जनजाति परिवार के लोगों का मकान नहीं बन सका है.

पीएम आवास के नाम पर भी घोटाला

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई. यही वजह है कि आज भी माझी जनजाति परिवार के लोग सरकारी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उन्हें मिले इसका इंतजार कर रहे हैं.

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