रायपुर, 25 अगस्त। CG CAIT : छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स में लंबे समय से चला आ रहा संविधान संशोधन विवाद अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने पूर्व कोषाध्यक्ष उत्तम गोलछा की ओर से दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है, और जल्द ही इस पर सुनवाई शुरू होने जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ उस समय शुरू हुई जब चेंबर के चुनाव से पहले पूर्व अध्यक्ष अमर पारवानी और उनकी टीम की ओर से किए गए संविधान संशोधन को लेकर श्रीचंद सुंदरानी ने सवाल खड़े किए थे। सुंदरानी और उनके साथियों ने इस संशोधन को अवैध बताते हुए पंजीयक, फर्म एंड सोसायटी के समक्ष अपील की थी।
सोसायटी ने उनकी आपत्ति स्वीकार करते हुए संविधान संशोधन को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद पारवानी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिए गए थे और सतीश थौरानी निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिए गए।
दायर याचिका को कोर्ट ने किया स्वीकार
संविधान संशोधन को निरस्त किए जाने के खिलाफ पूर्व कोषाध्यक्ष उत्तम गोलछा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अब दो महीने बाद कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता गोलछा का कहना है कि, हमने जो संविधान संशोधन किया था, वह पूरी तरह वैध था। सोसायटी ने पहले उसे मान्यता दी थी लेकिन अपील में उसे खारिज कर दिया गया। हमने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। गोलछा ने श्रीचंद सुंदरानी, वासु ज्योतसिंघानी व अन्य को इस मामले में पार्टी बनाया है।
अन्य पक्ष बोले
कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी बोले– पूर्व अध्यक्ष पारवानी और उनकी टीम ने नियमों के खिलाफ संविधान संशोधन किया था। हमने उसे चुनौती दी और फैसला हमारे पक्ष में आया। कुछ लोग चेंबर को राजनीतिक मंच बनाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
वर्तमान अध्यक्ष सतीश थौरानी बोले– हाईकोर्ट की तरफ से अभी तक चेंबर को कोई नोटिस नहीं मिला है।
पूर्व अध्यक्ष अमर पारवानी- फिलहाल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।
क्या है आगे की राह?
अब जबकि मामला हाईकोर्ट की निगरानी में आ चुका है, आने वाले दिनों में इसपर न्यायिक फैसला आने की उम्मीद है। यह निर्णय चेंबर के आगामी कार्यों और नेतृत्व पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है।
यह मामला केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के व्यापारिक वर्ग की पारदर्शिता और नेतृत्व की दिशा तय करने वाला है। सभी की निगाहें अब अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।