CG News: छत्तीसगढ़ के महासमुंद में बड़ा LPG घोटाला, सुरक्षा के लिए सौंपे गए 6 टैंकरों से 1.5 करोड़ की गैस चोरी, मालिक-डायरेक्टर फरार

Mahasamund LPG Scam: देश में रसोई गैस की कमी के बीच छत्तीसगढ़ के महासमुंद से कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां ‘ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स’ के मालिक पर करीब 1.5 करोड़ रुपये की गैस चोरी करने का आरोप लगा है. दरअसल, दिसंबर 2025 में पुलिस ने गैस से भरे 6 बड़े टैंकर जब्त किए थे, जिनमें 90 मीट्रिक टन LPG मौजूद थी. इन गाड़ियों के पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं थे, जिसके कारण पुलिस ने इन्हें पकड़कर थाने में खड़ा कर दिया है.

ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को सौंपी गई थी गाड़ियां

स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर सभी गाड़ियां ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को सौंप दी गई हैं. कंपनी के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सचिन ठाकुर पर गैस को घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बेचने का गंभीर आरोप लगाया गया है. इसके बाद जिला प्रशासन से एलपीजी गैस लीक होने की शिकायत दर्ज कराई है.

मालिक और डायरेक्टर फरार

यह पूरा मामला सिंघोड़ा थाना क्षेत्र का है. जांच के दौरान चोरी पकड़े जाने के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है. पुलिस ने कंपनी के एक स्टाफ सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कंपनी के मालिक और डायरेक्टर दोनों फिलहाल फरार हैं.

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा पुलिस ने सुरक्षा कारणों से जब्त किए गए 6 गैस कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए कलेक्टर से अनुमति मांगी. कलेक्टर के आदेश पर 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने इन ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर को सौंप दिया. इसके बाद संतोष अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर सभी गाड़ियों को थाने से रायपुर स्थित अपने प्लांट ले गया.

मालिक ने गैस बेचने की साजिश रची

ट्रकों को सौंपते समय उनका वजन नहीं कराया गया, जिसका फायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर और डायरेक्टर सचिन ठाकुर ने गैस चोरी की साजिश रची. सिंघोड़ा से अभनपुर के 200 किलोमीटर लंबे रास्ते में कई धर्मकांटे होने के बावजूद गाड़ियों का वजन नहीं किया गया. प्लांट के पास गाड़ियां खड़ी करने के कई दिनों बाद 6 और 8 अप्रैल को इनका वजन कराया गया, जिससे धोखाधड़ी का मौका मिला.

सबूत मिटाने की कोशिश

जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफिस से महत्वपूर्ण दस्तावेज और रजिस्टर गायब कर दिए. इन रजिस्टरों में अवैध लेन-देन और बिना बिल वाली खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड था, जिससे जुड़ी हुई एजेंसियों की पहचान हो सकती थी. जांच के दौरान भी आरोपियों ने तथ्यों से छेड़छाड़ की कोशिश की, जिसके कारण उनके खिलाफ सबूत नष्ट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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