छत्तीसगढ़ का चमकता सितारा: जिज्ञासु वर्मा ने 12वीं में रचा इतिहास, बने प्रदेश टॉपर…जानिए सफलता के पीछे की पूरी कहानी

Jigyasu Verma CG 12th Topper Inspiration Story: छत्तीसगढ़ बोर्ड के 12वीं रिजल्ट ने इस बार एक नई प्रेरणा कहानी सामने रख दी है। मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति के दम पर जिज्ञासु वर्मा ने पूरे प्रदेश में टॉप कर यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

कौन हैं जिज्ञासु वर्मा? छोटे शहर से बड़ी उड़ान

जिज्ञासु वर्मा बलौदा बाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हैं। उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 493 अंक हासिल करते हुए 98.60 प्रतिशत के साथ प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। उनके पिता नरेंद्र कुमार वर्मा और माता माहेश्वरी वर्मा हैं। बेटे की इस उपलब्धि ने पूरे परिवार और गांव का नाम रोशन कर दिया है।

सफलता के पीछे छिपी है सादगी भरी स्ट्रेटजी

जिज्ञासु की सफलता का राज किसी जादू में नहीं, बल्कि उनकी सादगी भरी पढ़ाई की आदतों में छिपा है। उन्होंने खुद बताया कि उन्होंने एक सामान्य टाइम टेबल बनाया और रोजाना नियमित पढ़ाई को प्राथमिकता दी। परीक्षा के दौरान उन्होंने टीवी और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली, जिससे उनका पूरा फोकस पढ़ाई पर रहा।

बिना दबाव के पढ़ाई, परिवार बना सबसे बड़ा सहारा

जिज्ञासु की इस सफलता में उनके परिवार का अहम योगदान रहा। घरवालों ने कभी उन पर अनावश्यक दबाव नहीं डाला, बल्कि उन्हें समझाकर और प्रोत्साहित करके आगे बढ़ाया। यही कारण रहा कि वे बिना तनाव के बेहतर प्रदर्शन कर पाए।

अब नजर JEE पर: अगला लक्ष्य भी तय

प्रदेश में टॉप करने के बाद जिज्ञासु का अगला लक्ष्य भी साफ है। वे अब JEE की तैयारी में जुट गए हैं और आगे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

टॉपर्स की सूची में इन नामों ने भी बनाई जगह

इस बार 12वीं परीक्षा में कई होनहार छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है।

  • बेमेतरा की ओमनी वर्मा – 98.20%
  • रायगढ़ के कृष महंत – 97.80%
  • दुर्ग की रिया साहू – 97.60%
  • महासमुंद की शहनाज परवीन – 97.60%
  • गौरेला पेंड्रा मरवाही की ताहिरा खान – 97.60%
  • धमतरी की कुसुमलता बिप्रे – 97.40%
  • रायपुर की हेमलता साहु – 97.40%
  • ओमकार कैवर्त – 97.40%
  • जशपुर की आशा यादव – 97.40%

हर छात्र के लिए संदेश: मेहनत और अनुशासन ही असली कुंजी

जिज्ञासु वर्मा की कहानी यह बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी यह उपलब्धि हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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