रायपुर कोर्ट का सख्त संदेश, दुष्कर्म और जातिगत अपमान मामले में उम्रकैद की सजा

 रायपुर, 04 मई 2026: छत्तीसगढ़ में महिला उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से जुड़े एक गंभीर मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। रायपुर की विशेष अदालत ने बालोद निवासी कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को दुष्कर्म और एससी एसटी एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दोस्ती से धोखे तक की कहानी, भरोसे का किया गलत इस्तेमाल

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और पीड़िता की पहचान जगदलपुर के एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में दोनों रायपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए साथ कोचिंग करने लगे। इसी दौरान आरोपी ने प्रेम प्रस्ताव रखा, जिसे युवती ने जाति अलग होने के कारण पहले ठुकरा दिया।

हालांकि आरोपी ने नौकरी लगने के बाद शादी का भरोसा देकर उसे रिश्ते में आने के लिए राजी कर लिया।

शादी के झांसे में बार-बार शोषण, साक्ष्यों ने खोली सच्चाई

कोर्ट में पेश तथ्यों के मुताबिक, फरवरी 2021 में आरोपी ने युवती को रायपुर के धरमपुरा स्थित अपने किराए के मकान में बुलाया और शादी का वादा कर जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 2023 और 2024 के दौरान भी वह लगातार शादी का झांसा देकर शोषण करता रहा।

नौकरी लगते ही बदला व्यवहार, जातिगत टिप्पणी से बढ़ा मामला

मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब वर्ष 2024 में आरोपी की सरकारी नौकरी लग गई। इसके बाद उसने पीड़िता से दूरी बनानी शुरू कर दी और उसे ‘नीची जाति की सतनामी लड़की’ कहकर अपमानित किया।

इसके बावजूद नवंबर 2025 में आरोपी ने फिर से शादी का भरोसा देकर युवती को मानपुर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

कोर्ट ने माना गंभीर अपराध, कई धाराओं में सुनाई सजा

सरकारी वकील के अनुसार अदालत ने पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। कोर्ट ने इसे सिर्फ दुष्कर्म नहीं बल्कि जातिगत उत्पीड़न का गंभीर मामला मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।

आरोपी को बीएनएस की धारा 64(2)(M) और 69 के तहत 10-10 साल का कठोर कारावास दिया गया है। साथ ही एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत उम्रकैद और 6 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

समाज को सख्त संदेश, कानून के आगे कोई बच नहीं सकता

यह फैसला स्पष्ट करता है कि महिला उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव जैसे मामलों में अदालतें अब बेहद सख्त रुख अपना रही हैं। ऐसे अपराधों के खिलाफ यह निर्णय समाज में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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