स्कूटी दीदी” : आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ता धमतरी

हैंडल थामते ही बदली दिशा, अब महिलाएं खुद लिख रही हैं अपनी नई परिभाषा

धमतरी, 15 फरवरी 2026(IMNB NEWS AGENCY) जिले में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में शुरू की गई पहल “स्कूटी दीदी” आज एक प्रेरक सफलता की कहानी बन चुकी है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने 17 महिलाओं को न केवल दोपहिया वाहन चलाना सिखाया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी दी। हैंडल थामते ही उनकी जीवन दिशा बदल गई और अब वे स्वयं अपनी नई परिभाषा गढ़ रही हैं।

प्रशिक्षण से परिवर्तन तक
प्रथम अरोड़ा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को स्कूटी संचालन की तकनीकी बारीकियों के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियम, यातायात संकेतों की समझ और सुरक्षित ड्राइविंग के व्यवहारिक कौशल सिखाए गए। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों में झलकता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण रहा कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।

लाइसेंस से नेतृत्व तक
नियमानुसार जिला परिवहन कार्यालय से लाइसेंस/अनुज्ञा प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अब अन्य महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाना सिखाने के लिए सक्षम होंगी। इस प्रकार “स्कूटी दीदी” पहल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर महिला से महिला तक सशक्तिकरण की मजबूत श्रृंखला तैयार कर रही है।

गणतंत्र दिवस पर दमदार प्रस्तुति
गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह में “स्कूटी दीदी” समूह ने स्कूटी के साथ अनुशासित एवं आकर्षक प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उपस्थित अतिथियों एवं नागरिकों ने उनके साहस, आत्मविश्वास और कौशल की मुक्त कंठ से सराहना की। यह क्षण उनके लिए गर्व, उपलब्धि और नई पहचान का प्रतीक बन गया।

सुविधा से स्वरोजगार तक
यह पहल महिलाओं के दैनिक जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से भी जोड़ रही है। अब महिलाएं स्वयं के कार्यों के लिए स्वतंत्र रूप से आवागमन कर पा रही हैं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं बैंकिंग कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा भविष्य में डिलीवरी, प्रशिक्षण या अन्य सेवा क्षेत्रों में आय के नए साधन तलाशने की दिशा में भी आगे बढ़ सकती हैं।
आज “स्कूटी दीदी” केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि नारी शक्ति, आत्मविश्वास और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। यह पहल दर्शाती है कि जब शासन, समाज और महिलाओं की इच्छाशक्ति एक साथ जुड़ती है, तो परिवर्तन निश्चित और सकारात्मक होता है।

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