Sukma के सुदूर अंचलों में नवाचार, खेल-खेल में मनोरंजक तरीके से सीख रहे हैं बच्चे

रायपुर, 16 जुलाई। Sukma : आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक प्ले-स्कूल की तरह विकसित करने के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं। इनमें दीवारों पर आकर्षक शैक्षिक चित्र, स्थानीय कबाड़ से बनी खेल-सामग्री और डिजिटल शिक्षण के लिए स्मार्ट स्क्रीन का उपयोग शामिल है, जिससे बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सुदूर क्षेत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। जिला कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री शिवदास नेताम के मार्गदर्शन में जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) गतिविधियों को रुचिकर और नवाचारपूर्ण तरीके से संचालित किया जा रहा है।

खेल-खेल में मनोरंजक तरीके से सीख रहे हैं बच्चे

इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान करना और उन्हें प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार करना है। इससे बच्चों में रटने की पारंपरिक पद्धति के बजाय शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ रही है, साथ ही उनकी रचनात्मकता, सामाजिक व्यवहार और सीखने की क्षमता का भी विकास हो रहा है।  यह 3 से 6 वर्ष के बच्चों के शारीरिक, मानसिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास पर केंद्रित है।

खेल-खेल में मनोरंजक तरीके से सीख रहे बच्चे

इसी क्रम में सुकमा परियोजना के रामपुरम सेक्टर के अंतर्गत गोलागुड़ा और मूरतोंडा आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष ईसीसीई गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के दौरान बच्चों को रंग-बिरंगे चार्ट, मनोरंजक कहानियां, बाल गीत, ब्लॉक एक्टिविटी, चित्र निर्माण, गिनती के खेल और रोल प्ले जैसी खेलकूद आधारित विधाओं से जोड़ा गया। इसके माध्यम से बच्चों को बेहद सहजता से अक्षर ज्ञान, संख्याओं की समझ और रचनात्मक सोच की जानकारी दी गई।

आंगनबाड़ी और स्कूल के बीच मजबूत हुआ समन्वय

इस अभियान की एक खास बात यह रही कि इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ निकटवर्ती प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। इससे आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है, जिससे बच्चों को स्कूल के वातावरण के लिए सहज रूप से तैयार किया जा सके। मूरतोंडा केंद्र: शिक्षिका परिणीति कश्यप और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुरजो के नेतृत्व में 15 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गोलागुड़ा केंद्र में\ शिक्षिका जयमाला और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चिंगी नाग की उपस्थिति में 17 बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में अपनी प्रतिभा दिखाई।

प्रारंभिक शिक्षा के मजबूत केंद्र बन रहे आंगनबाड़ी

महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक यशबाला सिंह ठाकुर के निरीक्षण में संचालित यह पहल सुदूर अंचलों के बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। जिला प्रशासन के इन प्रयासों से अब आंगनबाड़ी केंद्र केवल देखरेख के स्थान नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इस मुहिम को स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का भी भरपूर सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। प्रशासन का यह कदम बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने के साथ ही सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

Related Posts

Special Article : नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व, माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है

रायपुर, 5 अगस्त। Special Article : विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध…

Read more

Illegal Transport : रामानुजनगर वन परिक्षेत्र में अवैध काष्ठ परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, मुखबिर की सूचना पर रात्रि गश्त के दौरान सागौन लट्ठों से लदा पिकअप वाहन जब्त

रायपुर, 04 अगस्त। Illegal Transport : राज्य सरकार प्रदेश के वन परिक्षेत्रों में अवैध काष्ठ परिवहन पर सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के रामानुजनगर वन…

Read more