छत्तीसगढ़ में बोरे बासी पर सियासी घमासान, बयानबाजी से गर्म हुआ माहौल

 रायपुर :  1 मई श्रमिक दिवस के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel द्वारा मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाने के आयोजन के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। इस मुद्दे को लेकर अब सरकार और विपक्ष आमने सामने नजर आ रहे हैं।

शिक्षा मंत्री का तीखा हमला, ‘प्रोपेगेंडा’ बताकर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने इस आयोजन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल दौरे पर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाना एक सोची समझी रणनीति है और इसे प्रोपेगेंडा के तौर पर पेश किया गया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पिंडदान और पितृ भोज में होता है, ऐसे में इस आयोजन का संदेश क्या दिया जा रहा है।

कांग्रेस पर सवाल, त्योहारों के जरिए क्या साबित करना चाहती है पार्टी
मंत्री ने आगे सवाल उठाया कि कांग्रेस इस तरह के आयोजनों के जरिए क्या संदेश देना चाहती है। उन्होंने कहा कि क्या यह दिखाने की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोग सिर्फ बासी भोजन पर निर्भर हैं, या फिर यह महज एक राजनीतिक प्रदर्शन है।

पांच राज्यों के चुनाव पर बड़ा दावा, बंगाल में ‘सुनामी’ की बात
राजनीतिक बयानबाजी के बीच मंत्री Gajendra Yadav ने आगामी चुनावों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में भाजपा को शानदार सफलता मिलेगी और बंगाल में परिणाम ‘सुनामी’ की तरह सामने आएंगे। उनके मुताबिक कम से कम तीन राज्यों में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनेगी।

मेधावी छात्रों के लिए बड़ी घोषणा, 1.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
इसी दौरान शिक्षा मंत्री ने छात्रों के लिए एक अहम घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि 10वीं और 12वीं की मेरिट सूची में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को सरकार एकमुश्त 1 लाख 50 हजार रुपये की सहायता राशि देगी, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई में आर्थिक मदद मिल सके।

हेलीकॉप्टर यात्रा पर भी सियासत, कांग्रेस पर फिर साधा निशाना
बच्चों की हेलीकॉप्टर यात्रा को लेकर उठे सवालों पर भी मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार नकली दिखावे के बजाय सीधे आर्थिक सहायता देने पर विश्वास करती है। उनके अनुसार 1.5 लाख रुपये की राशि से छात्र अपने परिवार के साथ बेहतर तरीके से यात्रा और पढ़ाई दोनों कर सकते हैं।

परंपरा बनाम राजनीति, मुद्दा बना बोरे बासी
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब सांस्कृतिक प्रतीक भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते जा रहे हैं। बोरे बासी जैसा पारंपरिक भोजन अब केवल संस्कृति तक सीमित नहीं, बल्कि सियासी चर्चा का अहम मुद्दा बन गया है।

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